बेटी होने के बाद भी मेरी मां मुझे 'मां-बहन' की गंदी-गंदी गालियां देती हैं, जानिए वजह

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बेटी होने के बाद भी मेरी मां मुझे 'मां-बहन' की गंदी-गंदी गालियां देती हैं, जानिए वजह

इस लड़की के साथ ऐसा नहीं है। उसे न केवल अपनी मां की गंदी-गंदी गलियां सुननी पड़ती है बल्कि अब इसका असर उसके मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ने लगा है।

सवाल: मैं 30 साल की एक अविवाहित लड़की हूं। मुझे गोद लिया गया था। मैं अपनी एकल मां के साथ रहती हूं। दरअसल, मेरी मां सिंगल मदर हैं। उन्होंने अपने दम पर ही मुझे बड़ा किया है।

हालांकि, मेरी समस्या मेरी मां का सिंगल होना नहीं है बल्कि हम दोनों के विचार आपस में बिल्कुल भी नहीं मिलते हैं। मेरी मां और मेरी नहीं बनती। हम दोनों एक-दूसरे से काफी अलग हैं।

मैं बाहर जाना चाहती हूं। मैं अपना जीवन जीना चाहती हूं, लेकिन मैं ऐसा नहीं कर सकती। ऐसा इसलिए क्योंकि मेरी मां मुझे हर पल नया जीवन देने के लिए उसका ऋणी महसूस कराती है।


मैं मानती हूं कि मेरे पास आज जो कुछ भी है,

वह सब उन्हीं का दिया हुआ है। लेकिन सच कहूं तो उनका व्यवहार बिल्कुल भी एक मां जैसा नहीं है। वह न केवल मुझे मां-बहन की गंदी-गंदी गालियां देती हैं बल्कि अब यह मेरे मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डालने लगा है।

मुझे समझ नहीं आता इकलौती बेटी होने के बाद भी वह मेरे साथ इस तरह का व्यवहार कैसे कर सकती हैं। क्या मैं एक बेटी के रूप में अपनी जिम्मेदारी से भाग रही हूं?

मेरे साथ उनका इस तरह का बर्ताब सही है। मुझे अपनी मां के साथ अपना रिश्ता सुधारने के लिए क्या करना चाहिए। मैं समझती हूं कि इस तरह स्थिति का समाना करना आपके लिए कितना मुश्किल है।

हालांकि, आपकी मां ने आपके लिए जो कुछ भी किया है, उसके लिए आपकी कृतज्ञता देखकर खुशी होती है। लेकिन इसे किसी भी रूप में दुर्व्यवहार को सहन करने के कारण के रूप में नहीं गिना जा सकता।


ऐसा इसलिए क्योंकि एक बेटी के रूप में आपका यह सब सहना आपको बुरी तरह परेशान कर सकता। खासकर तब जब आपको पता हो कि उनके सिवा आपका कोई भी नहीं है।

हालांकि, इस दौरान यह महसूस करना बहुत ही महत्वपूर्ण है कि कहीं आप तो अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट रहीं, जिसकी वजह से आपकी मां का रवैया आपके प्रति ऐसा हो रहा हो।

अपनी मां को भी समझना पड़ेगा

रिश्ता चाहे कोई भी क्यों न हो उसमें नियंत्रण-भावनात्मक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करना सही नहीं है। सहानुभूति-करूणा, धैर्य, सम्मान और हर बात को अच्छे की सुनने की आदत न केवल रिश्तों को पोषित करती है बल्कि इससे चीजें भी खराब नहीं होती हैं।

आप चाहें तो इस विषय पर किसी विशेषज्ञ की भी मदद ले सकती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इससे आपको अपनी मां के क्रोध से निपटने के लिए बेहतर तरीकों का पता चल सकता है। वह जो चाहती हैं, उनके बारे में भी तर्कसंगत तरीकों से सोचा जा सकता है।

मैं आपको यह सब इसलिए भी कह रही हूं क्योंकि जब लोगों को जीवन के हर कदम पर मुश्किलें मिलती हैं, तो वह केवल 'लेने वाले' बन जाते हैं।

वह तभी किसी के प्रति दयालु होते हैं, जब उन्हें लगता है कि सामने वाला उनसे निःस्वार्थ प्रेम कर रहा है। यही एक वजह भी है कि अन्य कारणों की वजह से आपकी मां का ऐसा व्यवहार हुआ है।

उनकी मदद करने से पहले खुद की मदद करें। वहीं अगर आप अपने आसपास के विचारों-भावनाओं, पैटर्न और उथल-पुथल से निपटने में असमर्थ हैं, तो चिकित्सा की मदद लेने में कोई बुराई नहीं है।