सिंचाई के लिए सोलर पंप लगाने पर मिल रहा ये बड़ा फायदा, लोन के साथ साथ बिजली बेच कर भी बन जायेंगे मालामाल

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राजस्थान के किसान अब पूरी तरह से बंजर या आधे बंजर जमीन पर सिंचाई के लिए सोलर पंप लगा सकेंगे। प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा और उत्थान महाभियान (PM-KUSUM) के तहत इसके लिए उन्हें सरकार की तरफ से बिना कोलेटरल सिक्योरिटी के लोन मिलेगा। इस योजना की सबसे खास बात है कि किसान इन सोलर पंपों के जरिए अपनी सिंचाई जरूरतों को तो पूरा करेंगे ही, साथ ही वे बिजली वितरण कंपनियों को सोलर पंप से उत्पादित बिजली बेचकर कमाई भी कर सकेंगे।

कोरोना महामारी के कारण लोन वितरण का काम प्रभावित हुआ है। लेकिन सरकार की कोशिशों से अब इसमें तेजी आएगी। सोलर पंप स्थापित करने के लिए राजस्थान सरकार (Rajasthan Government) ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से बगैर कोलेटरल सिक्योरिटी के किसानों को लोन मुहैया कराने का अनुरोध किया था, जिसे बैंकों ने स्वीकार कर लिया है। केंद्र की PM-KUSUM योजना के तहत सोलर प्लांट की स्थापना के साथ किसानों को उनकी बंजर भूमि से आय सृजन की परिकल्पना की गई है। योजना के तहत किसान सोलर प्लांट से उत्पन्न बिजली को बिजली वितरण कंपनियों को बेच भी सकते हैं।


अब तक 11 प्लांट हो चुके हैं स्थापित
केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा निर्धारित लक्ष्य से अधिक क्षमता के साथ जुलाई 2021 में अपनी भूमि पर सोलर प्लांट की स्थापना के लिए किसानों के चयन को पूरा करने वाला राजस्थान पहला राज्य बन गया था। राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम ने कुसुम योजना के तहत 623 किसानों को 722 मेगावाट के संयंत्र आवंटित किए हैं।

अतिरिक्त मुख्य सचिव (ऊर्जा) सुबोध अग्रवाल ने द हिन्दू से बातचीत करते हुए बताया कि इनमें से 11 प्लांट अब तक राज्य में स्थापित किए जा चुके हैं। आधा किलोवाट से 2 मेगावाट तक के सोलर प्लांट के लिए बिना कोलेटरल सिक्योरिटी के स्वीकृत किए जाने वाले लोन को तेजी से वितरित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि बिजली खरीद समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद सोलर प्लांट से उत्पन्न बिजली की खरीद 3.14 रुपए प्रति यूनिट की दर से की जाएगी। बिजली कंपनियां लोन की किस्त सीधे बैंकों में और बाकी की राशि किसानों के बैंक अकाउंट में जमा करेंगी। जिन किसानों के पास निवेश करने के लिए पैसा नहीं है, वे अपनी जमीन निजी डेवलपर्स को पट्टे पर दे सकते हैं और वार्षिक आय प्राप्त कर सकते हैं।

ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बनेंगे
राज्य सरकार ने 38,000 मेगावाट अक्षय ऊर्जा की क्षमता विकसित करने की योजना के साथ दिसंबर 2019 में सौर ऊर्जा, पवन और हाइब्रिड ऊर्जा नीतियों को अपनाया था। कुसुम योजना के तहत विकसित की जाने वाली क्षमता 2600 मेगावाट की होगी, जिसके लिए 623 आवेदकों को लेटर ऑफ अवार्ड जारी किया जा चुका है।

अग्रवाल ने कहा कि कुसुम योजना किसानों के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, क्योंकि वे अपनी कृषि के लिए अनुपयोगी भूमि या बंजर भूमि से राजस्व उत्पन्न कर सकते हैं। यह हरित ऊर्जा के उत्पादन को बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार पैदा करने में भी मदद करेगा। आगे चलकर सरकारी क्षेत्र की ट्यूबवेल और लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं को भी सोलर प्लांट से चलने योग्य बनाने में मदद करेगा। सौरकरण के लिए प्रदान करेगा।