गरीब मेधावी बच्चों के लिए 500 संस्कृति माडल स्कूल खोलेगी हरियाणा सरकार, जानिए क्या बोले सीएम ?

हरियाणा सरकार गरीब मेधावी बच्चों के लिए 500 स्कूल खोलने जा रही है। प्राइवेट स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। इन स्कूलों में उन बच्चों को दाखिला दिया जाएगा जिनके अभिभावकों की आय दो लाख से कम है।

 
 | 
panchkoola-common-man-issues,news,state,Sanskriti Model School, Haryana Model School, Haryana School, Haryana News,  संस्कृति माडल स्कूल,  हरियाणा माडल स्कूल,  हरियाणा स्कूल,  हरियाणा समाचार,  HPCommonManIssues, Haryana CommonManIssues,News,National News,Haryana news   hindi news, Jagran news

डेली हरियाणा न्यूज़ चंडीगढ़। हरियाणा के प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए प्रदेश सरकार इस साल के अंत तक 500 नए स्कूल खोलने जा रही है। यह स्कूल संस्कृति माडल स्कूल होंगे और सीबीएसइ से उनकी मान्यता होगी। इन स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर ऐसे अभिभावकों के बच्चों को प्राथमिकता के साथ दाखिले दिए जाएंगे, उनकी वार्षिक आय दो लाख रुपये तक अथवा इससे कम होगी।

हरियाणा में फिलहाल 138 संस्कृति माडल स्कूल खुल चुके हैं। इन स्कूलों में आठवीं क्लास तक बच्चों को शिक्षा दी जाएगी। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने शुक्रवार को नए संस्कृति माडल स्कूल खोलने की प्रदेश सरकार की योजना की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि गरीब बच्चों को अच्छी शिक्षा हासिल करने का अधिकार है, लेकिन निजी स्कूल संचालक उन्हें अपने स्कूलों में दाखिले नहीं दे रहे हैं।

हरियाणा सरकार की जानकारी में आया है कि हरियाणा स्कूल शिक्षा नियमावली 2004 की धारा 134-ए के तहत प्राइवेट स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को 25 प्रतिशत सीटों पर मुफ्त दाखिले पाने का अधिकार है। हरियाणा सरकार ने परिवार पहचान पत्रों में दर्ज आय के आधार पर गरीब अभिभावकों को चिन्हित किया है। जिन परिवारों की आय दो लाख रुपये से अधिक है, उनके बच्चों को गरीबी रेखा से ऊपर मानकर मुफ्त दाखिले नहीं दिए जाएंगे, लेकिन जिनकी दो लाख रुपये वार्षिक से कम आय है, उनके बच्चों को हर हाल में दाखिले मिलेंगे।

ऐसे करीब 40 हजार बच्चों ने मुफ्त दाखिलों के लिए मूल्यांकन परीक्षा दी थी। इनमें से 12 हजार बच्चों को दाखिले मिल चुके हैं। परिवार पहचान पत्रों में दर्ज आय और अभिभावकों द्वारा दिखाई गई आय का मिलान किया जा रहा है। इस मिलान के पूरा होने के बाद करीब आठ हजार बच्चे और ऐसे निकलेंगे, जिन्हें गरीबी रेखा के दायरे में माना जा सकता है और उन्हें प्राइवेट स्कूलों में दाखिला लेने का अधिकार है।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल के अनुसार सरकार की जानकारी में आया है कि कई स्कूल ऐसे हैं, जो इन गरीब बच्चों को दाखिला देने की सरकार से अधिक फीस चाहते हैं। अभी तक ग्रामीण इलाकों में पांचवीं क्लास तक के बच्चों के लिए प्रति बच्चा 300 रुपये मासिक और आठवीं क्लास तक के लिए बच्चों के लिए 500 रुपये मासिक फीस हरियाणा सरकार इन प्राइवेट स्कूलों को देती है। शहरी क्षेत्र के प्राइवेट स्कूलों में यह फीस 500 रुपये और 700 रुपये मासिक है। प्रदेश सरकार ने गरीब बच्चों की सहूलियत और प्राइवेट स्कूलों की मांग को देखते हुए इस फीस में बढ़ोतरी कर दी है।

सीएम ने इस तरह से निकाला बीच का रास्ता

मुख्यमंत्री ने शिक्षा मंत्री से मिले फीडबैक के आधार पर इस विवादित मसले का समाधान किया है। उन्होंने बताया कि इस फीस में सभी श्रेणी में प्रति बच्चा 200 रुपये मासिक फीस बढ़ाने का फैसला लिया गया है, जो सरकार की ओर से स्कूल संचालकों को दिया जाएगा। अब ग्रामीण क्षेत्रों में यह फीस 500 रुपये और 700 रुपये तथा शहरी क्षेत्रों में 700 रुपये और 900 रुपये मासिक होगी। इसलिए सरकार का प्राइवेट स्कूल संचालकों से अनुरोध है कि वह बचे हुए गरीब बच्चों को अपने स्कूलों में दाखिले प्रदान करें। मनोहर लाल ने बताया कि सरकार द्वारा 200 रुपये प्रति बच्चा प्रति माह फीस बढ़ाने से स्कूलों को एक साल में 2400 रुपये का फायदा होगा और एक साल में सरकार के खजाने पर पांच करोड़ रुपये अतिरिक्त भार पड़ेगा।

मुख्यमंत्री के अनुसार अगले शिक्षा सत्र से गरीब बच्चों के अभिभावकों को उनके दाखिलों के लिए किसी तरह की दिक्कत नहीं आने वाली है। संस्कृति माडल स्कूल बनने के बाद उनमें इन बच्चों को दाखिले दिए जाएंगे। सरकार इन स्कूलों को प्राइवेट स्कूलों के समकक्ष लाकर खड़ा करेगी। इसके अलावा राज्य सरकार के जितने भी आठवीं क्लास तक स्कूल हैं, उनमें भी पढ़ाई के स्तर में सुधार के लिए सरकार कटिबद्ध है। नए खुलने वाले संस्कृति माडल स्कूलों में दाखिला लेने वाले अन्य बच्चों के लिए फीस भी होगी और अध्यापकों का कैडर भी अलग होगा।

बैकडोर इंटरी करने वाले कर्मचारियों के दबाव में नहीं आएगी सरकार

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने जगह-जगह आंदोलन कर रहे कर्मचारियों और उनकी ढाल बनने वाले विपक्ष के नेताओं को करारा जवाब दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों में आउटसोर्सिंग के तहत भर्ती हुए ऐसे लोग, जिन्हें कोर्ट के हस्तक्षेप से अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ा है, वह जगह-जगह आंदोलन पर उतारु हैं। इन आंदोलनकारियों को विपक्ष का समर्थन हासिल है। विपक्ष और आंदोलनकारी दोनों यह समझ लें कि सरकार न तो उनके उकसावे में आएगी और न ही दबाव सहन करेगी।

चंडीगढ़ में मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों में कर्मचारियों को बैकडोर इंटरी दिलाई गई। विवाद अदालत में गए तो न्यायपालिका ने अपने विवेक से फैसले लिए। अब वही लोग ऐसे कर्मचारियों को आंदोलन करने के लिए उकसा रहे हैं, जिन्होंने शुरू में इन कर्मचारियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। विपक्ष ऐसा इसलिए कर रहा है, क्योंकि उसके पास मौजूदा सरकार के विरुद्ध कोई ठोस मुद्दा नहीं है।

मनोहर लाल के अनुसार नौकरियों की बैकडोर इंटरी खत्म करने के लिए सरकार ने हरियाणा कौशल रोजगार निगम बनाया है। जिस व्यक्ति को सरकार को काम करने का अनुभव है अथवा कोर्ट के फैसलों की वजह से जिन्हें अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है, उन्हें हमने दोबारा सिस्टम के जरिए नौकरी में आने का मौका दिया है। ऐसे व्यक्ति हरियाणा कौशल रोजगार निगम के पोर्टल पर नौकरी के लिए अपना पंजीकरण करा सकते हैं। उन्हें नौकरी में प्राथमिकता दी जाएगी। प्रदेश में भविष्य में पिक एंड चूज अथवा ठेकेदारी व्यवस्था बिल्कुल भी चलने वाली नहीं है।

मुख्यमंत्री ने नौकरी से निकाले गए पीटीआइ का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि हमने 800 पीटीआइ को अपनी सरकार में एडजस्ट किया। बचे हुए इतने ही पीटीआइ को हम खेल सहायक के रूप में शिक्षा विभाग में भर्ती करना चाह रहे थे, लेकिन विपक्ष के कहने पर वह कोर्ट में चले गए। वहां उनकी भर्ती पर ही रोक लग गई। यदि वह विपक्ष की बजाय सरकार पर भरोसा करते या हमारी बात मानते तो उन्हें भी एडजेस्ट करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी होती। उन्होंने कहा कि अभी भी वह आंदोलन पर उतारु हैं और विपक्ष के हाथों में खेल रहे हैं।

अधिकतर वर्ग हमारे कामकाज से संतुष्ट

सीएम मनोहर लाल ने स्पष्ट किया कि हमारी सरकार कमजोरी नहीं है। हम पुरानी तमाम अव्यवस्थाओं को ठीक करने में कामयाब हुए हैं। कुछ रह गई हैं, जिन्हें सिलसिलेवार ठीक किया जा रहा है। हम किसी भी कार्य के लिए विपक्ष के उकसावे और कर्मचारियों के दबाव में नहीं आने वाले हैं। कांग्रेस के पास कोई मुद्दा नहीं है। इसलिए वह बिना मुद्दों के कर्मचारियों को उकसाकर सरकार पर दबाव बनाना चाहती है। समाज का अधिकतर वर्ग हमारे कामकाज से संतुष्ट है। हमारे पास ऐसा फीडबैक है और हम बेहतर से बेहतर करने की तरफ अग्रसर हो रहे हैं।