जानिए कानून वापस लेने का क्या है तरीका, संसद में क्या क्या करना होगा?

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Farm Laws Repeal

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए तीन कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला किया है। इन तीन कानूनों को लेकर देश में लंबे समय से प्रदर्शन चल रहा था। अब सरकार ने इन कानूनों को वापस लेने का फैसला किया है। पीएम मोदी ने कानून को वापस लेने का फैसला लेते हुए कहा है, ‘आज मैं आपको, पूरे देश को, ये बताने आया हूं कि हमने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का निर्णय लिया है। इस महीने के अंत में शुरू होने जा रहे संसद सत्र में, हम इन तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की संवैधानिक प्रक्रिया को पूरा कर देंगे।’

ऐसे में सवाल है कि आखिर जब एक कानून को वापस लेना होता है तो इसकी क्या प्रक्रिया होती है। साथ ही समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर किस तरह से एक कानून को वापस लिया जा सकता है और इसका क्या प्रोसेस है…


क्या है कानून वापस लेने का तरीका?
दरअसल, किसी कानून को निरस्त करना या वापस लेने का प्रोसेस भी एक तरह से फिर से कानून बनाने जैसा ही है। इसके लिए सबसे पहले, सरकार की ओर संसज में एक बिल पेश किया जाता है और इसे कानून लाने की तरह ही पास करवाना होता है। अब सरकार को बस इतना करना है कि सरकार को ‘कृषि कानून (रद्द) 2021’ के शीर्षक वाला विधेयक लाना होगा, जिसमें कहा गया हो कि इसका उद्देश्य साल 2020 के कृषि कानून को रद्द करना है।

इस विधेयक में यह स्पष्ट होना चाहिए कि यह पुराने कानून को रद्द करने के लिए है। साथ ही अगर मूल या वास्तविक कानून को भारतीय संसद के दोनों सदनों में साधारण बहुमत के साथ पास किया गया था तो रद्द करने वाले विधेयक को भी दोनों सदनों में साधारण बहुमत के साथ पारित करवाना होगा। वहीं, अगर कानून संवैधानिक संशोधन होता है तो उसके लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है और रद्द विधेयक भी ऐसे ही दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी।

क्या है दूसरा तरीका?
इसका एक दूसरा तरीका भी है, जिसके जरिए कानून को रद्द किया जा सकता है। इसमें संसद का संयुक्त सत्र बुलाया जा सकता है और इसमें इसे रद्द करने पर विचार किया जा सकता है। जैसे अगर बिल लोकसभा में पास हो जाए और राज्यसभा में रुक जाए, तो ऐसी स्थिति के लिए संसद का जॉइंट सेशन बुलाया जा सकता है और रद्द करने वाले बिल को पास करवाया जा सकता है।

बता दें कि ऐसी स्थिति पहले भी हो चुकी है, जब मोरारजी देसाई की सरकार बैंकिंग रिजॉल्यूशन एक्ट रद्द करने के लिए बिल लाई थी। यह बिल लोकसभा में पास हो गया था लेकिन राज्यसभा में इसका विरोध हुआ। इसलिए निरसन विधेयक यानी रद्द करने वाली बिल के लिए संसद का जॉइंट सेशन बुलाया गया था।