Petrol Diesel Shortage: कई राज्‍यों में क्‍यों हुई पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल-डीजल की कमी - पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया

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Petrol Diesel Shortage

सरकार ने बुधवार को कहा कि निजी कंपनियों की ओर से कटौती करने के कारण सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (पीएसयू) से जुड़े पेट्रोल पंपों पर दबाव बढ़ा है। इस कारण कई राज्यों में पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल-डीजल की कमी का संकट पैदा हो गया है। तेल मंत्रालय का कहना है कि अतिरिक्त मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति की जा रही है।


पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा, मांग बढ़ने से पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति पर असर


मंत्रालय ने स्वीकार किया कि मांग बढ़ने के कारण पीएसयू आपूर्ति नहीं कर पा रही हैं जिससे ग्राहकों की परेशानी बढ़ी है। मंत्रालय का कहना है कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और कर्नाटक में अधिकांश पेट्रोल-डीजल की बिक्री निजी कंपनियों के पेट्रोल पंपों द्वारा की जा रही है। लेकिन निजी कंपनियों ने तेल आपूर्ति में कटौती कर दी है। इसके अलावा इन राज्यों में तेल टर्मिनल और डिपो ज्यादा दूरी पर स्थित हैं, जिससे पेट्रोल पंपों पर आपूर्ति में देरी होती है।

इन राज्यों में संकट

राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, गुजरात, पंजाब और हिमाचल प्रदेश।

नुकसान पर बिक्री कर रही हैं सरकारी कंपनियां

सरकारी तेल कंपनी इंडियन आयल, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम कच्चे तेल के मुकाबले पेट्रोल-डीजल की कीमत नहीं बढ़ा रही हैं। यह कंपनियां पेट्रोल 14 से 18 रुपये प्रति लीटर और डीजल 20 से 25 रुपये प्रति लीटर के घाटे पर बेच रही हैं। नायरा एनर्जी, जियो-बीपी और शैल जैसी प्राइवेट कंपनियां यह घाटा सहने की स्थिति में नहीं हैं।


 इन वजहों से बढ़ी मांग

- कई राज्यों में धान की बुआई और अन्य कृषि गतिविधियां बढ़ने से डीजल की मांग बढ़ी।

- थोक में डीजल की कीमत ज्यादा होने के कारण पेट्रोल पंपों पर बोझ बढ़ा।
 
- घाटे से बचने के लिए निजी कंपनियों की ओर से बिक्री में कटौती।

इंडियन आयल के पेट्रोल पंपों पर समस्या नहीं

इंडियन आयल के पेट्रोल पंपों पर डीजल और पेट्रोल की कोई कमी नहीं है। हालांकि, भारत पेट्रोलियम और हिन्दुस्तान पेट्रोलियम से जुड़े पेट्रोल पंपों पर आपूर्ति में समस्या है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि मांग के अनुसार देश में पर्याप्त पेट्रोल-डीजल उपलब्ध है, लेकिन स्थानीय स्तर पर परिवहन संबंधी दिक्कतों के कारण अस्थायी किल्लत बढ़ी है। इसके अलावा कई राज्यों में निकाय चुनाव की गतिविधियों से भी मांग बढ़ी है।