गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए ये है जरूरी किस्में, जानें उन्नत किस्मों के चुनाव व कृषि विशेषज्ञों की राय

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गेहूं की इन किस्मों से किसानों को मिलेगी अच्छी पैदावार

धान की कटाई के बाद किसानों के सामने एक बड़ी समस्या पैदा होती है। दरअसल, यह समस्या किसान द्वारा अपनी आने वाली गेहूं की फसल के लिए उन्नत किस्मों का चुनाव न कर पाना है।जानकारी के अभाव में किसान गेहूं की ऐसी किस्म लगा लेते हैं जिनमें ज्यादा बीमारी होती है और पैदावार भी कम ही निकल पाती है। लेकिन आज हम अपने इस आर्टिकल में बताएंगे कि किसान कौन सी उन्नत किस्में लगाकर अच्छी पैदावार ले सकते हैं।

विशेषज्ञों की सलाह-

कुरुक्षेत्र के कृषि विभाग के क्वालिटी कंट्रोल इंस्पेक्टर डॉ. शशि पाल ने बताया कि गेहूं की बिजाई करने का समय शुरू हो गया है। इसमें अगर किसान सही और अच्छा उत्पादन देने वाली गेहूं की किस्मों का चुनाव ना कर पाए तो उनको काफी नुकसान होता है।

इसलिए उन्होंने कुछ ऐसी किस्मों के बारे में बताया है जो अच्छी पैदावार देती है और हरियाणा सहित उत्तर भारत के कई राज्यों में लगाई जा सकती है।

इन किस्मों का चुनाव सबसे उचित-

विशेषज्ञों द्वारा बताई गई किस्मों में डब्ल्यूएच-1270, डीबीडब्ल्यू-303, डीबीडब्ल्यू- 187, एचडी-3226, एचडी-2965, डब्ल्यूएच- 1021, डब्ल्यूएच- 1224 शामिल हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन किस्मों में बीमारी बहुत कम आती है और पैदावार भी अच्छी निकलती है। इसलिए किसानों के लिए खेती, जो घाटे का सौदा बनती जा रहा है उस घाटे से उबारने का काम गेहूं की ये किस्में करेंगी।

अच्छी पैदावार के लिए यह जानकारी जरूरी-

अच्छी पैदावार के लिए अच्छी किस्म के बार में जानना तो जरूरी है ही, साथ ही किन किस्मों को लगाने से बचना चाहिए ये जानना भी जरूरी है।

कुछ किस्में ऐसी भी हैं जिनको किसानों को भूल कर भी नहीं लगाना चाहिए क्योंकि इनमें ज्यादा बीमारी आती है। इन किस्मों में पीबीडब्ल्यू- 343 और पीबीडब्ल्यू- 542 शामिल हैं।

गेहूं की बिजाई से पहले यह काम जरूरी-

विशेषज्ञों का कहना है कि गेहूं की बिजाई करने से पहले गेहूं के बीज को बावरस्टीन नामक दवाई से उपचार कर लेना चाहिए।

एक एकड़ खेत में 40 किलो गेहूं का बीज डाला जाता है। अगर गेहूं की बिजाई पछेती की जाती है तो उसमें 40 किलो की जगह 50 किलो बीज खेत में डालना चाहिए। वहीं एक बार यूरिया और एक बार डीएपी भी डालना चाहिए।

मौजूदा समय में हरियाणा में डीएपी की काफी समस्या हो रही है। इसलिए डीएपी की जगह किसान एनपीके या एसएसपी डाल सकते हैं जो डीएपी की तरह ही काम करता है।

कैसे करें गेहूं की बिजाई-

डॉ. शशि पाल ने आगे कहा कि गेहूं की बिजाई किसी भी तरीके से कर सकते हैं। किसान छिनटा विधि या फिर किसी अन्य मशीन के द्वारा भी बिजाई कर सकते हैं।

अगर मशीन से सीधी बिजाई करते हैं तो उसमें किसानों को प्रति एकड़ 3 से 5 हजार रुपये की बचत हो जाती है और फानों का प्रबंधन भी हो जाता है। इस तरीके से गेहूं की बिजाई करने से और उन्नत किस्म का चुनाव करने से किसान गेहूं की अच्छी पैदावार ले सकते हैं।