सरसों की नई किस्म किसानों को देंगी तरक्की का नया रास्ता, कमा सकेंगे अच्छा मुनाफा

काशीपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र ने सरसों की अलग-अलग प्रकार की कई नई प्रजातियां शामिल की है। जिसकी बुआई करके किसाने अपने आय को बढ़ा सकेंगे। कृषि विज्ञान द्वारा शामिल की गई नई प्रजातियां कम लागत में अधिक पैदावार होने का दावा किया जा रहा है।
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सरसों की खेती कर किसान अब अच्छा मुनाफा कमा सकेंगे। इस बार रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद सरसों के दाम उच्च स्तर पर बने रहने की उम्मीद है। अभी भी सरसों 3850 रुपए प्रति क्विंटल के दाम पर बिक रही है। इस बार मिले अच्छे दामों से प्रोत्साहित किसान आगामी सीजन में सरसों की ज्यादा से ज्यादा खेती करने की योजना बना रहे हैं। इसी वजह से सरकार को भी उम्मीद है कि सरसों की पैदावार डबल हो सकती है।

खरीफ फसलों की खेती नहीं करने वाले किसानों ने अभी से सरसों की अगेती खेती की तैयारी में जुट गए हैं। कुछ किसानों ने खेत को सिर्फ सरसों बोने के लिए ही खाली रखा था जिसमें अब बुआई शुरू कर दिए हैं। हालाकिं, अक्टूबर में हुई बारिश की वजह से सरसों और लाही की बुआई में थोड़ा विलंब हो रहा है। काशीपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र ने सरसों की अलग-अलग प्रकार की कई नई प्रजातियां शामिल की है। जिसकी बुआई करके किसाने अपने आय को बढ़ा सकेंगे। कृषि विज्ञान द्वारा शामिल की गई नई प्रजातियां कम लागत में अधिक पैदावार होने का दावा किया जा रहा है।

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार सरसों की नई प्रजातियां में तेल भी अधिक मात्रा में निकलता है। काशीपुर कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ जितेंद्र क्वात्रा जिन्हें फरवरी माह में गन्ना, अगेती सब्जियां और जनवरी में प्याज व लहसून की खेती करना है। वह किसान अपने खेतों को खाली रखते हैं, उनके लिए सरसों की अगेती खेती काफी लाभदायक हो सकती है और वह अतिरिक्त मुनाफा हासिल कर सकते हैं। किसान भाई कम समय में पककर तैयार हो जानी वाली भारतीय सरसों की अच्छी प्रजाति लगाकर मुनाफा कमा सकते हैं।

कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ जितेंद्र क्वात्रा ने बताया कि लाही की नई प्रजातियों में पीटी-303, पीटी-30, पीटी-507 और भवानी तराई में अच्छी पैदावार होगी। यह सरसों 75 से 95 दिनों में 10 से 14 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पैदावार होगी। इसके अलावा पीली सरसों में विनोय बी-9, पंत पीली सरसों-1, पंत श्वेता व पंत गिरिजा आदि प्रकार की नई प्रजातियां प्रदेश के मैदानी, तराई, भाभर व मध्य पर्वतीय क्षेत्रों के लिये बेहतर है। यह प्रजातियां 95 से 128 दिनों में 10 से 19 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तैयार पैदावार होगी।

इसके अलावा सरसों की नरेंद्र अगेती राई-4, पंत राई-19, कांति, कृष्णा, पंत राई-20, पंत राई-21, वरदान, आशीर्वाद में अच्छी पैदावार होती है। यह 100 से 130 दिनों में पककर तैयार होती है और 14 से 18 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन होती है। उन्होंने बताया कि इन प्रजातियों की समय से बुआई करने के बाद सिंचाई पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होगी है।