सरसों बुआई रकबे ने बिगाड़ा सरकार का गणित, ऐसे बढ़ी डीएपी की मांग

प्रदेश के दक्षिण जिलों में सरसों की अच्छी फसल होती है। यही कारण है कि इस बार दक्षिण हरियाणा के किसानों का रूझान सरसों की ओर होने से सरसों का रकबा करीब चार से पांच गुना तक बढ़ गया है।
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अक्टूबर माह से चली आ रही डीएपी खाद की किल्लत अब नवंबर माह में जाकर ठीक हो पाई है। हालांकि कृषि एवं कल्याण विभाग के अनुसार गेहूं बिजाई के समय ही डीएपी खाद की मांग बढ़ती है तथा विभाग इसी तर्ज पर नवंबर माह में इसे मुहैया करवाता है लेकिन इस बार एकाएक अक्टूबर माह में डीएपी की बढ़ती किल्लत ने सरकार ओर कृषि विभाग के अधिकारियों की नाक में दम कर दिया था।

डीएपी खाद न मिलने के कारण किसानों ने समय-समय पर जाम भी लगाया था तथा पुलिस पहरे में डीएपी खाद का वितरण किया गया था। कृषि एवं कल्याण विभाग के अधिकारियों के अनुसार गेहूं की बिजाई अक्टूबर के आखिरी सप्ताह से नवंबर माह तक की जा सकती है। इस प्रकार से किसानों को प्रति किला की दर से एक बैग डीएपी की जरूरत पड़ती है लेकिन इस बार अक्टूबर माह की शुरुआत में ही डीएपी की मांग एकाएक बढ़ गई। किसानों की लंबी लाइन लगने गई।

इस बार सरसों तेल के दाम पिछले साल से दोगुना से भी अधिक बढ़ गए हैं। 90 रुपये प्रति लीटर बिकने वाली सरसों की तेल के दाम 200 को भी पार कर गए हैं। ऐसे में किसानों को भी पता है कि इस बार सरसों के अच्छे दाम मिलने वाले हैं। प्रदेश के दक्षिण जिलों में सरसों की अच्छी फसल होती है। यही कारण है कि इस बार दक्षिण हरियाणा के किसानों का रूझान सरसों की ओर होने से सरसों का रकबा करीब चार से पांच गुना तक बढ़ गया है।

सरसों बिजाई के लिए डीएपी की मांग बढ़ने के कारण अधिकतर उत्तरी हरियााणा का डीएपी भी दक्षिण हरियाणा में भेजा गया है। यही कारण रहा कि उत्तरी हरियाणा में शुरुआती दिनों में डीएपी खाद की किल्लत बनी। जिले में तीन गुना बढ़ा सरसों का रकबा : डा. कर्मचंद कृषि एवं कल्याण विभाग के उप निदेशक डा. कर्मचंद ने बताया कि इस बार पूरे प्रदेश के किसानों का रूझान सरसों की फसल की ओर बढ़ा है।

जहां दक्षिण हरियाणा में सरसों का रकबा चार से पांच गुना तक बढ़ा है तो वहीं कैथल में भी 1700 हेक्टेयर से बढ़कर करीब 5500 हेक्टेयर तक पहुंच गया है। सरसों की बिजाई अक्टूबर माह में होने के कारण किसानों को डीएपी खाद की अक्टूबर माह में ही अतिरिक्त आवश्यकता पड़ी जिस कारण कुछ समय के लिए खाद की किल्लत बनी थी। अब जिले में खाद की कोई किल्लत नहीं रही है।