कृषि विभाग की भविष्यवाणी हुई सच, क्या अब किसानों को मिल पायेगी उत्पादकता?

उत्पादन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाने वाला खरीफ सीजन इस साल बुवाई से लेकर कटाई तक पानी में डूब गया था ।कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी थी कि वे नुकसान की भरपाई के लिए अपने रब्बी की उचित योजना बनाएं।किसानों से समय-समय पर केवल चना की खेती पर ध्यान देने का आग्रह किया गया था।
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Agriculture Department s prediction came true but will farmers get productivity

उत्पादन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाने वाला खरीफ सीजन इस साल बुवाई से लेकर कटाई तक जोरों पर था। कृषि विभाग द्वारा यह सलाह दी गई थी कि किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए रब्बी की उचित योजना बनाने की आवश्यकता है। किसानों से समय-समय पर केवल चना की खेती पर ध्यान देने का आग्रह किया गया था। रुक-रुक कर हुई बारिश के कारण रबी की बुवाई में देरी हुई लेकिन औरंगाबाद की बुवाई की रिपोर्ट आ गई है और किसानों ने कृषि विभाग की सलाह का सख्ती से पालन किया है।और औरंगाबाद संभाग गांव में चने का रकबा बढ़ा रहा है।लेकिन अब देखना यह होगा कि उत्पादन बढ़ेगा या नहीं।

बारिश और बादल छाए रहने के कारण इस समय रबी सीजन की बुवाई नहीं हुई। इससे ज्वार की फसल प्रभावित होंगे।लेकीन चना और गेहूं की देर से बुवाई से उत्पादन प्रभावित नहीं हुआ है।औरंगाबाद जिले के संभाग गांव में 42 प्रतिशत बुवाई पूरी हो चुकी है।अकेले चने की फसल अधिकांश क्षेत्र को कवर करती है।


कृषि विभाग की सलाह चने की बुवाई पर ध्यान दे किसान
खरीफ सीजन के दौरान औसत से अधिक बारिश होने के कारण कृषि विभाग ने किसानों को रबी सीजन के दौरान ज्वार के बजाय चने पर ध्यान देने की सलाह दी थी। इसलिए चना का रकबा बढ़ने की उम्मीद थी लेकिन मराठवाड़ा में ज्वार और अन्य फसल की बुवाई के बीच में ही बेमौसम बारिश सुरु हैं इसलिए बोए गए क्षेत्र में दोहरी बुवाई संकट की स्थिति में ।जहां बुवाई नहीं की गई वहां बुवाई में देरी हुई।अब ज्वार की बुवाई का समय समाप्त हो गया है।इसलिए किसान चना पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं।कृषि विभाग की सलाह के साथ-साथ प्रकृति की कृपा से चने का रकबा बढ़ रहा है।

 किसा राज्य में कितना हुआ है बुवाई
औरंगाबाद, बीड और जालना जिलों में रबी की बुवाई औसत क्षेत्रफल के 42 फीसदी पर की गई है।बारिश के कारण यह आंकड़ा कम हुआ है। लेकिन  इन तीनों जिलों में चने की फसल ही ज्यादा बोई जाती है।औरंगाबाद जिले में 28 हजार 213 हेक्टेयर में रबी की बुवाई हो चुकी है।बीड जिले में 1 लाख 82 हजार 340 हेक्टेयर में बुवाई की गई है। तो वही जालना जिले में 75 हजार 140 हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी है।बीड जिले में सबसे अधिक चना बोई जाने वाली फसल है।

ऐसे रखे  चना बुवाई का ध्यान
चना एक महत्वपूर्ण रबी फसल है।इस वर्ष पौष्टिक वातावरण के कारण चने की खेती में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। कृषि विभाग भी इसे बढ़ावा दे रहा है।इसलिए किसान चना की बुवाई 10 दिसंबर तक कर सकते हैं। विजय, विशाल, फुले कृषि विभाग द्वारा बुवाई के लिए अनुशंसित किस्में हैं।बुवाई करते समय दो पंक्तियों के बीच की दूरी 30 सेमी और दो पौध के बीच की दूरी 10 सेमी होनी चाहिए। बुवाई से पहले बीजोपचार करने से कीटों का प्रकोप कम होता है।पहली सिंचाई बुवाई के 30 दिन बाद करनी चाहिए।