Martial Rape अपराध है या नहीं? एकमत नहीं है दिल्ली हाईकोर्ट के जज, अब सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई

मैरिटल रेप अपराध है या नहीं इसको लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई के बीच जजों के बीच सहमति नहीं बन पाई है। मैरिटल रेप को लेकर उच्च न्यायालय के जजों ने विभाजित फैसला सुनाया है। यही वजह है कि अब इस मामले की सुनवाई बड़ी बेंच को सौंपी गई है।
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Martial Rape अपराध है या नहीं? एकमत नहीं है दिल्ली हाईकोर्ट के जज, अब सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई

दिल्ली हाई कोर्ट की दो जजों की बेंच ने मैरिटल रेप को अपराध घोषित करने पर विभाजित फैसला सुनाया। बुधवार को इस मामले में हुए सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय के जजों के बीच एक सहमति नहीं बन पाई। यही वजह है कि जजों ने विभाजित फैसला सुनाया। एक जज ने मैरिटल रेप को अपराध माना जबकि दूसरे जज ने यह कहकर असहमति जता दी कि यह संविधान का उल्लंघन नहीं करता है।

अब इस मामले को तीन जजों को बेंच को भेजा गया है। अब मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होगी। हाई कोर्ट ने सभी याचिकाकर्ताओं को सुप्रीम कोर्ट जाने की इजाजत दे दी है। बता दें कि, दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका में मांग की गई थी कि शादी के बाद अगर महिला के साथ उसका पति उसकी मर्जी के खिलाफ शारिरिक संबंध बनाता है तो उसे मैरिटल रेप के दायरे में लाना चाहिए।

मैरिटल रेप अपराध है या नहीं इसको लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। हाईकोर्ट के जजों के एकमत ना होने की वजह से अब इस मामले को बड़ी बेंच को सौंप दिया गया है। दरअसल दोनों जज इस बात पर सहमत थे कि इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी चाहिए। हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सुप्रीम कोर्ट जाने की अनुमति दे दी है।

क्यों बड़ी बेंच को सौंपा गया?
कानूनी मतभेद इस मामले को बड़ी बेंच को सौंपे जाने की बड़ी वजह बनी। दरअसल Marital Rape मामले पर सुनवाई कर रहे जस्टिस राजीव शकधर और जस्टिस हरिशंकर के विचारों में कानून के प्रावधानों को हटाने को लेकर मतभेद था। ऐसे में इस मामले को बड़ी बेंच को सौंपा गया है। पीठ ने याचिकाकर्ता को शीर्ष अदालत में अपील करने की छूट दी है।
 
बता दें कि इस मामले में पहले केंद्र सरकार ने मौजूदा कानून की तरफदारी की थी लेकिन बाद में यू टर्न ले लिया और इसमें बदलाव की वकालत की थी। हाई कोर्ट ने 21 फरवरी को सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।

ये है मामला
दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका में मांग की गई थी कि शादी के बाद अगर महिला के साथ उसका पति उसकी मर्जी के खिलाफ शारिरिक संबंध बनाता है तो उसे मैरिटल रेप के दायरे में लाना चाहिए।

याचिकाकर्ता ने इस मामले में अलग-अलग देशों का उदाहरण भी दिया और महिला के सम्मान का जिक्र करते हुए कहा कि अगर अविवाहित महिला के साथ उसकी मर्जी के बिना शारिरिक संबंध बनाने को अपराध की श्रेणी में माना जाता है तो शादी के बाद भी महिला के साथ जबरन शारिरिक संबंध बनाना अपराध की श्रेणी में आना चाहिए।